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Sunday, September 5, 2010

जयपुर में पतंगबाजी और चुदाई...

जयपुर में पतंगबाजी और चुदाई...

हेल्लो दोस्तों में जयपुर का रहने वाला २१ साल का नोजवान हु...
हमारे जयपुर में १४ जनवरी (सकरात ) के दिन पतंगे उडती है ...
हम लोग पुरे जनवरी महीने में छत पर ही रहते और पतंगे उड़ाते थे...
में इस बार अपने दोस्त तरुण की छत से ही पतंगे उड़ा रहा था ...
उसका घर मेरे घर से १ किलोमीटर दूर था ...
हम पतंग उड़ाते हुए बहुत मजे करते थे..
तरुण के छत के पीछे वाली छत पर रोज़ एक खुबसूरत लड़की आती थी ...
मेने तरुण से उसका नाम पूछा तो बोला इसका नामे रक्षिता है...
और साथ में ये भी बताया की ये किसी को लाइन नहीं देती है...
मेने कहा में इस खुबसूरत रक्षिता से दोस्ती करना चाहता हु ........तो वो बोला तू पागल तो नहीं हो गया जो लड़की आज तक हमसे दोस्ती नहीं की वो तुझ से क्या करेगी ...में बोला चल लगी १०००/- की शर्त में इस से दोस्ती करके रहूगा..
वो बोला ठीक है...
अब आप लोगो को उसका आकर्षक फिगर बताता हु...
उसके बूब्स की साइज़ ३६ और शक्ल मानो करीना सामने आ गई हो...
मेने उसके नाम पर रोज़ मुठ मरता था...
बात ११ जनवरी २००९ की है उस दिन में पतंग उड़ा रहा था ...किस्मत से उस दिन हवा भी रक्षिता के घर की तरफ थी...
मेने देखा की वो कपडे सुखाने छत पर आई है तो मुझे एक आईडिया आया और मेने चला कर उसके छत पर रखे गमलों में अपनी पतंग अटका दी...
और आवाज लगाई ...मैडम मेरी पतंग सुलझा दो...
उसने पहले तो मेरी तरफ गुस्से से देखा फिर पतंग हटाती हुई बोली.... मिस्टर मेरा नाम रक्षिता है...
में बोला अच्छा नाम है और मेरा नाम रोहित है....
और मेने ये पतंग चला के अटकाई थी क्यों की मुझे आपसे दोस्ती करनी है...
फिर वो गुस्से भरे लाल चेहरे से बोली...
तुमने सिर्फ दोस्ती करने के लिए मुझे परेशान किया...
दोस्ती के बारे में सोच कर बताओगी ..
में बोला ठीक है.....
अगले दिन में छत पर उसका वेट कर रहा था करीब २ बजे छत पर आई ...जब में अकेला ही छत पर था..
आकर बोली मुझे लगता है तुम एक अच्छे इन्सान हो क्योकि तुमने उसी टाइम सच्चाई बता दी...
इसलिए मेने निर्णय लिया है की मुझे तुमसे दोस्ती करना मंजूर है...
में ख़ुशी से उछल पड़ा ...
फिर मेने उस से उसका फ़ोन नंबर लिया...
मेने तरुण से पूछा की की रक्षिता के घर में कोन कोन है...
वो बोला इसका भाई और भाभी साथ रहती है...
मुझे लगा मुझे इसके भाई से दोस्ती करनी चाहिए ...जिस से रक्षिता के घर में घुस सकू...
में तरुण से बोला यार मुझे रक्षिता के भाई से मिला दे...
तरुण बोला मिला तो दूंगा पर आगे बात तुझे ही संभालनी पड़ेगी..
मेने कहा ठीक है..
शाम को जब उसका भाई आया तो तरुण ने उस से मुझे मिलाया ...
अगले दिन १३ जनवरी थी तो मेने रक्षिता के भाई से कहा कल में आपके साथ आपकी छत पर
पतंग उड़ा सकता हु तो बोले हाँ क्यों नहीं मुझे भी कोई साथी मिल जाएगा..
अगले दिन हम दोनों ९ बजे छत पर पतंग उड़ाने चले गए...
हमने २-३ पतंगे उड़ाई तब रक्षिता हमारे लिए कुछ खाने के लिए ले आई...
तब उसका भाई पतंग उड़ा रहा था जब वो आई...उसका ध्यान हमारी तरफ नहीं था ..
मेने उसी आंख मार दी और उसने मुस्कान दिखाई...
अब तो में उसी चोदने के बारे में सोचने लगा...
फिर वो निचे चली गयी,,,
उसका भाई १०.३० बजे ऑफिस जाने के लिए तयार हो कर चला गया...
और जाते हुए बोल गया जब तक इच्छा हो उड़ा लेना... और किसी चीज की जरुरत हो तो मांग लेना मेने कहा ठीक है...
भैया के जाने के करीब १ घंटे बाद रक्षिता ऊपर आई बोली जल्दी पतंग उतारो मुझे तुम्हे कुछ दिखाना है जल्दी नीचे आओ...
मेने जल्दी से पतंग उतारी और बोला क्या दिखाना है...
बोली अंदर तो चलो और अपने रूम में ले गई ...
और मेरा हाथ पकड कर बोली रोहित मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो ...में तुम से प्यार करने लगी...हु...
ऐसा एक दम से सुनकर में तो दंग रह गया फिर सोचा अब जल्दी चूत मिल जाएगी...

में बोला मुझे भी तुम्हे देखते ही प्यार हो गया था ... चलो अब में ऊपर जा रहा हु भाभी ने देखा तो मुश्किल ...
वो बोली वो पड़ोस में गई है...
मुझे एक मस्त किस कर ना...
में बोला ले मेरी जान और कस के उसे पकड़ा और के लम्बा किस दिया..
किस देते देते..में उसके बूब्स भी दबा रहा था ..अब वो गर्म हो चुकी थी...
मेंने उसकी गांड दबाना शुरू किया ...
तभी अचानक घंटी बजी ...में तो सीधे छत पर भाग गया और पतंग उड़ाने लगा..
अगले दिन मकर सक्र्न्ति थी..
में अगले दिन सुबह ८ बजे छत पर जाने वाला था पर कोहरा होने के कारण में ९.३० पर छत पर गया...मेरी नहीं रक्षिता की..
उस दिन उसने डार्क ब्लू कलर की tight जींस पहनी थी और tight गुलाबी कलर का टॉप पहना था क्या मस्त लग रही थी मुझे तो इच्छा हो रही थी अभी बहो में लेकर चोदना शुरू कर दू..
वहा पर करीब १२ बजे तक रक्षिता के भैया ने पतंग उड़ा कर अपने दोस्त के घर चले गए साथ में भाभी को भी लेकर गए...
मुझे तो मजा आ गया ...
मुझे अब रक्षिता को चोदने का मौका मिलने वाला था..
भैया के जाते ही में रक्षिता के लिपट गया ...और उसे बहुत लम्बा किस दिया ...
और गांड पकड कर उसे अपने हाथो से उठा लिया ...
थोड़ी देर बाद मेने उसे बेड पर लिटा दिया ..

उसकी जींस में से ही चूत को सहलाने लगा ....उसे मजा आने लगा और वो आहे भरने लगी...
में अब बूब्स को भी टॉप में से ही दबाने लगा थोड़ी देर में उसकी चूत गीली हो गई...
वो बोली जानू..मेरी चूत मस्त माल निकल चूका है...अब आप अपने मस्त से लोडे से मेरी चूत का उदघाटन करोगे...
में बोला जानेमन इतनी जल्दी भी क्या है ... पहले पुरे मजे तो ले लो फिर तेरी चूत का भी उदघाटन करेगे ...
वो बोली आप जेसा कहे मेरे जानू...
फिर मेने उसे फिर से किस किया और..उसके बूब्स को उसके टॉप से आज़ाद किया...
उसके बूब्स क्या तो मस्त थे मेने उसके बूब्स को मुह में लेकर चुसना शुरू किया...
उसे बहुत मजा आया और वो आहे भरने लगी...
जानू तुम तो बहुत मस्त चूसते हो ... चूसते रहो...
फिर मेने उसकी जींस को उतार फेका अब वो सिर्फ पंटी में थी और बहुत मस्त लग रही थी...उसकी काली कलर की पंटी बिलकुल अप्सरा लग रही थी...
फिर मेने उसकी पंटी उतारी और उसकी चूत को चूमने लगा ... उसकी चूत में एक मस्त खुशबु आ रही थी...वो आहे भरने लगी
अआहछ आह्ह
फिर मेने उसे कहा जान अब मुझे भी तो इन कपड़ो से आजाद करो बोली ये लो जानू...
फिर उसने मेरा टी शर्ट उतार फेका और मेने सिने पर किस करने लगी...
मुझे काफी मजा आ रहा था साथ साथ में उसके बूब्स भी दबा रहा था..
फिर उसने मेरी जींस उतारी और बोली अब ये मस्त लंड आज़ाद होगा...
और उसने मेरी underwear उतारी और मेरे फड फडाते ७.५ इंच के लंड को निकला और मुह में ले लिया...
और उसे मजे से चूसने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा था ...
में उसके बूब्स भी दबा रहा था..
१५ मिनट बाद मेरा पानी निकला और वो चूसने लगी... मुझे काफी मजा आया..
फिर १० मिनट में हमने कुछ खाया और ...
फिर मेने उसकी चूत में अपना लोडा डाला ..
वो पहली बार चुद रही थी इसलिए मेने उसकी चूत में आराम से अपना लंड डाला
थोडा अन्दर जाने के बाद वो चिल्लाई ... रोहित निकालो इसे मुझे दर्द हो रहा है में बोला थोड़ी देर की बाद अच्छा लगेगा ...थोडा सहन कर लो इसे ...वो बोली ठीक है...
फिर मेने चुदाई चालू रखी ...थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा और वो बोली रोहित और तेज़ चोदो फाड़ दो मेरी चूत को...
में और तेज़ चोदना शुरू किया थोड़ी देर में वो झड़ गई .. मुझे काफी मजा आ रहा था में लगातार चोदता रहा ... थोड़ी देर में ...मै भी झड़ गया उसने मेरा पानी अपने मुह में पी लिया...
फिर मेने उसकी गांड भी मारी..हमने काफी मजा किया...
पर उसकी भाभी ने हमे पकड लिया और फिर मेने उसे भी लंड का सवाद चखाया ...उसकी भाभी की चुदाई अगली कहानी में ...


अगर जयपुर की किसी लड़की, भाभी या किसी को भी मेरे लंड का स्वाद चाहिए तो मुझे मेल करना मत भूलना ...मेरा मेल है

rohit_kh2011@yahoo.com
rohit.4jaipur@gmail.com

Thursday, September 2, 2010

खूब चुदाई की

मैं एक बार फिर आपके सामने अपना अनुभव पेश करने जा रहा हूँ। उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगा।

दोस्तों आपको मैं अपनी ज़िन्दगी के आठ महीने पीछे ले चलता हूँ, बात हमारे स्कूल के वार्षिक उत्सव की है, जो कि हर बार २५ दिसम्बर को मनाया जाता है।

उस दिन हम सब अच्छे अच्छे कपड़े पहन कर गए थे। मैंने उस दिन काले रंग की शर्ट और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी। सभी लड़कियों की निगाहें मुझ पर थी। उस दिन मेरी गर्लफ्रेंड के साथ उसकी एक सहेली आकृति भी आई थी। वो देखने में, बाप, क्या माल थी ! एकदम गोरी चिट्टी और मोटे-मोटे मम्मों वाली। देखते ही मेरी जींस बीच में से टाइट हो गई और मैंने बड़े ही प्यार से उसे हेल्लो बोला। उसने भी बड़े प्यार से मुझे हाय कह कर जवाब दिया, पर मेरी आँखें तो उसके मम्मों पर ही थी।

उसने एकदम मेरी तरफ देखा और बोली,'जनाब, कहाँ खो गए?'

मैंने बोला- कहीं नहीं ! बस कुछ दिनों से इतनी गर्मी महसूस नहीँ की।

वो समझ गई कि मैं क्या बात कर रहा हूँ। इतने में मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे गुस्से भरी आँखों से देखा, मैंने हँस के बात बदल दी और मैं अपने दोस्तों के साथ चला गया। मेरे दोस्त मुझे एक कमरे में ले गए जहां उन्होंने ब्लू फिल्म लगा रखी थी। एक तो पहले ही गरम माल देख के आया और ऊपर से यह सब, मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपनी जींस के ऊपर से अपना लंड रगड़ने लगा... और अह्ह्ह आह्ह्ह की आवाजें मेरे मुँह से निकलने लगी।

फिल्म में एक लड़का लड़की के मम्मों के बीच अपना लंड रख के रगड़ रहा था और बीच बीच में लड़की के मुँह में अपना लंड डाल रहा था.. 'म्म युम्मी मम आह्ह्ह' जैसे शब्द लड़की बोल रही थी।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। इतने में क्या देखता हूँ कि पीछे से मुझे कोई बुला रहा है। मैंने जल्दी जल्दी लंड जींस के अन्दर डाला...... और ' कौन है ' बोलते हुए बाहर गया..

बाहर देखा तो आकृति खड़ी थी, और बोली कि रेशन (मेरी गर्लफ्रेंड) आपको बुला रही है..

मैंने कहा- चलो... चलें..

रास्ते में वो बोली- अभिषेक अन्दर क्या कर रहे थे?

मैं डर गया और बोला,'तुमने सब देख लिया?'

वो बोली- हाँ और आपका वो बड़ा सा लंड भी !

मेरी आंखे फटी की फटी रह गई। मैंने डरते डरते बोला- आकृति को कुछ मत बताना !

वो बोली- नहीं नहीं... बिलकुल भी नहीं..पर अगर आप ब्लु फिल्म की जगह असल में करो तो ज्यादा मज़ा आएगा ...

हाय रब्बा ये तो.. मेरे मन की मुराद पूरी हो गई' मैंने कहा।

क्या मतलब..!

वो अपना दुपट्टा नीचे करके बोली.. क्या इन्हें दबाने में तुम्हें मज़ा आएगा?

मैंने भी बिना कोई मौका गंवाते हुए उसमें अपना मुँह घुसा दिया और अपनी जीभ से उसके मम्मे चाट लिए .. और तिरछी आँख से उसे देखा!

वो भी एक दम मस्त हो गई थी।

मैंने कहा- फिर शुरू करें?

उसने भी हाँ में हाँ मिला दी और मैं उसका हाथ पकड़ के उसे रेडरूम में ले गया।

रेडरूम में घुसते ही मैंने रूम लाक कर दिया और अपनी जींस उतार दी.. मेरा लम्बा लंड देख के उससे रहा नहीं गया.. और उसने अपना मुँह खोल कर सारा लंड अन्दर घुसा लिया। 'चक्क चक शह..' जैसी आवाज़ आई और उसने लंड बाहर निकाला और उसका सुपाड़ा अपने दांतों से रगड़ना शुरू कर दिया। मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था तो मैंने अपने हाथ उसके सर के ऊपर रख दिया और अन्दर की तरफ धकेलने लगा। उसके होंठ मेरे माल से सफ़ेद हो गए थे... और वो मेरा लंड चूसे जा रही थी...

फिर उसने मेरी अण्डकोषों को अपने मुँह में डाला और दबा दबा के चूसने लगी। मेरा लंड एकदम सीधा तना हुआ था और वो अपनी जीभ से उसे चाट रही थी और अपने मुँह और लबों से रगड़ रही थी..

अब मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने उसे उठाया और.. उसकी कमीज़ के ऊपर से उसके मम्मे निकाल लिए और उन्हें चूसने लगा.. आह्ह्ह गोरे गोरे मम्मे.. और उन पर भूरे रंग के चूचुक !

मैंने उन्हें निचोड़ दिया और एक तरह से मैं उसके मम्मों को खाने की कोशिश करने लगा..

मैंने अपनी जीभ से उसके मम्मे चाट चाट के साफ़ कर दिए.. और वो नीचे से अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रगड़ रही थी.. मैंने भी अब उसकी सलवार उतार दी और उसकी पैंटी के अन्दर ऊँगली डाल दी..

वाह क्या माल थी वो.. एक दम टाइट चूत और कोई बाल नहीं..

मैंने एक दम ३ उंगलियाँ उसके चूत के अन्दर घुसा दी..

और वो चिल्लाई और उसने मेरी गरदन पर काट लिया..

मैंने कहा- ये क्या...?

तो बोली- मुझे भी दर्द होता है..

तो मैंने कहा- जब मैं तुझे चोदूँगा तो... फिर तो तू मुझे खा ही जायेगी..

वो बोली- वही तो मैं चाहती हूँ..

मुझे यह सुन कर बड़ा मज़ा आया और मैंने सीधा उसके होठों में अपनी जीभ घुसा दी...

वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और अम्म आम्म करके मुझे किस करने लगी...

मेरा एक हाथ उसके मम्मों पे और एक उसकी गांड पे था..

और साथ साथ मैं उसे चूस रहा था.... वो भी मेरा लंड जान लगाकर रगड़ रही थी...

थोड़ी देर बाद मैंने उसे ज़मीन पर लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा.. नरम और नमकीन चूत... मैंने ज़िन्दगी में पहली बार ऐसी चूत चाटी थी... और.. उसने मुझे जन्नत का मज़ा दिलवा दिया...

थोड़ी देर बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गयी... और मैंने उसका पानी हाथ से साफ़ कर दिया और फिर चूत चाटनी शुरू कर दी..

वो बोली- चौद भी दे जान अब..! कितना तड़पाएगा..?

मैंने कहा- मेरी जान बस.. एक मिनट और..

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर घुसा दी... और.. सारा पानी..चाट लिया..

हाआआयीई...कह के उसने मेरे सर पे हाथ रखा..

उसके बाद मैं उसके ऊपर लेट गया..और अपना लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया..

थोड़ी मुश्किल हुई पर घुस गया...

वो थोड़ा चिल्लाई.. पर बाद में मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और धक्के लगाने शुरू कर दिए...

आआहा या उईई की आवाजों ने चुदाई को और मजेदार बना दिया..

मैंने भी धक्के तेज़ कर दिए और जब मैंने सांस लेने के लिए अपने होंठ उसके होंठों से अलग किये तो उसने मुझे गाली दी और बोली- माँ के लोड़े ! तेरे में दम नहीं है?...... फाड़ ड़ाल आज मेरी चूत को... माँ के यार आअह्ह चोद दे आज इस.....लड़की को... मेरी जान निकाल दे .. आअज.. आअह्ह उई.. मरर गई... जान मैं...

मैंने भी अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए और जोर जोर से हांफ़ने लगा....

वो भी चिल्ला रही थी...

हम दोनों को सर्दियों में पसीना आने लगा...

करीब २० मिनट के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर से उठ गया....

मैंने कहा- जान मज़ा ही आ गया !

वो बोली- अब तो और आएगा..

और.. अपनी गांड मेरे सामने कर दी....

मैंने जाकर सीधा उसकी गांड पर थप्पड़ मारा और उसे चूमा !

..मोटी.. गोरी गांड.. किस्मत वालो को ही मिलती.. है.. और...

थोड़ी देर गांड दबाने के बाद मैंने उसके अन्दर अपना लंड डाल दिया और उसके मम्मे दबाने लगा...

वो भी पूरा लंड ले रही थी..

मैंने धक्के तेज़ किए तो उसके मुँह से आम्म आम्म्म अम्म.. आह्ह..की आवाजें आने लगी...

मैंने उसके बाल खींच दिए तो वो आआउई.. आऔईइ करके चिल्लाने लगी..

मैंने दबा दबा कर उसकी गांड मारी और एक दम लाल कर दी...

फिर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके मुँह में डाल दिया...

वो भी जोर जोर से उसे हिला रही थी....

और कुछ देर के बाद मैं फिर से झड़ गया...

उसने मेरा सारा माल पी लिया...

और मैंने उसके बाद उसे एक किस की और बोला- जान ! आज तो मज़ा ही आ गया... थैंक्स ...!

वो बोली.. लव यू माय हनी!....

यह बोल के हमने कपडे पहने.. और वाशरूम जाकर मुँह धोया और वापिस आ गए....

जब हम वापिस आए तो मेरी गर्लफ्रेंड मिली और बोली- कहाँ रह गए थे तुम..?

तो मैंने कहा- तुम्हारी सहेली को जन्नत की सैर करवाने गया था..

और बोलकर आकृति और मैं हँसने लगे.....

फिर आकृति ने बात को संभालते हुए बोला- चंडीगढ़ दिखाने गया था...

तो मैंने भी बोला- हाँ.. और बोला- थोड़ा काम था.. इसलिए... हम बिना बताये चले गए.. 'सॉरी जानू'

वो बोली- कोई बात नहीं...

इसके बाद मैंने आकृति का नंबर ले लिया और उसके घर जाकर उसे खूब चोदा...........
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Sunday, May 2, 2010

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Sunday, November 8, 2009

तीन भाभीयांऔर नॉकरानी बसंती

1में हूँ राज. कै सेहैआपसब मैंआप को हमारेगांवकी बात बताने जा रहा हूँ मेरे िहसाब से उसने
कुच्छ बुरा नहींिकया हैहांलािक कई लोग उसेपापी समझेंगें. कहानी पढ़ कर आप ही फ़ैसला
कीिजएगा की जो हुआ वो सही हुआहै या
नहींयेकहानीमेरेदोःतमंगलकीहैअबाआपलोगमंगलकीजुबा नी.
इसकहानीकामजालो कई साल पहलेकी बात हैजब में अठारह साल का था और मेरेबड़ेभैया,
काशी राम चौथी शादी करना सोच रहेथे.
हम सब राजकोट सेपच्चास km दरू एक ��◌ोटेसेगाँव में ज़मीदार हैं एक सौ बीघा की खेती है
और लंबा चौड़ा व्यवहार है हमारा. गाँव मे चार घरऔर कई दकु ानें है मेरे माता-िपताजी जब में
दस साल का था तब मर गए थे. मेरेबड़ेभैया काश राम और भाभी सिवता नेमुज़ेपल पोस कर
बड़ा िकया.
भैया मेरेसेतेरह साल बड़ेहें. उन की पहली शादी के वईत में आठ साल का था. शादी के पाँच साल
बाद भी सिवता को संतान नहीं हुई. िकतने डॉक्टर को िदखाया लेिकन सब बेकार गया. भैया ने
दसू री शादी की, चंपा भाभी के साथ तब मेरीआयु तेरह साल की थी.
लेिकन चंपा भाभी को भी संतान नहीं हुई. सिवताऔर चंपा की हालत िबगड़ गई, भैया उन के साथ
नौकरानीयों जैसा व्यवहार कर नेलगे. मुझेलगता हैकी भैया नेदो नो भािभयों को चोदना चालू
ही रक्खा था, संतान की आस में.
दसू री शादी के तीन साल बाद भैया ने तीसरी शादी की, सुमन भाभी के साथ. उस वईत में सोलह
साल का हो गया था और मेरेबदन में फ़कर् पड़ना शुरू हो गया था. मेरेवृषाण बड़ेहो गयेबाद में
काखः में और लोडेपर बाल उगेऔर आवाज़ ग॑ा हो गया. मुँह per मुच्च िनकल आई. लोडा लंबा
और मोटा हो गया. रात को ःवप्न-दोष हो नेलगा. में मूठ मारना सीख गया.
सिवता और चंपा भाभी को पहली बार देखा तब मेरे man में चोदनेका िवचार तक आया नहींथा,
में बच्चा जो था. सुमन भाभी की बात कुच्छ ओर थी. एक तो वो मुझ सेचार साल ही बड़ी थी.
दसू रे, वो काफ़ी ख़ूबसूरत थी, या कहो की मुज़े ख़ूबसूरत नज़रआती थी. उस के आने के बाद में हैर
रात कल्पना कीयेजाता था की भैया उसेकैसेचोदतेहोंगेऔर रोज़ उस के नाम मूट मार लेता था.
भैया भी रात िदन उस के िपच्छेपड़ेरहतेथे. सिवता भाभी और चंपा भाभी की कोई क़ीमत रही
नहीं थी. में मानता हूँ की भैया बच्चे के वाःते कभी कभी उन दो नो को भी चोदते थे. तजुबई की
बात येहैकी अपनेमें कुच्छ कमी हो सकती हैऐसा माननेको भैया तैयार नहींथे. लंबेलंड सेचोदे
और ढेर सारा वीरय प��ी की चूत में उंदेल देइतना काफ़ी हैमदर् के वाःतेबाप बनानेके िलए ऐसा
उन का दरध िवःवास था. उन्हो नेअपनेवीरय की जाँच करवाई नहींथी.
उमर का फ़ासला होनेसेसुमन भाभी के साथ मेरी अचची बनती थी, हालन की वो मुझेबच्चा ही
समझती थी. मेरी मौजूदगी में कभी कभी उस का पल्लूिखसक जाता तो वो शरमाती नहींथी.
इसी िलए उस के गोरेगोरेःतन देखनेके कई मौक़े िमलेमुझे. एक बार ःनान के बाद वो कपड़े
बदल रही थीऔर में जा पहुँचा. उस काआधा नंगा बदन देख में शरमा गया लेिकन वो िबना िहच
िकचत बोली, ' ख़टखटा के आया करो.'
दो साल यूँगुज़र गयेमें अठारह साल का हो गया था और गाँव की ःकूल की 12 वी में पढ़ता था.
भैया चौथी शादी के बारेमें सोचनेलगे. उन दीनो में जो घटनाएँघटी इस का येबयान है
बात ये हुई की मेरी उॆ की एक नॉकरानी, बसंती, हमारे घर काम पे आया करती थी. वैसे मेने उसे
बचपन से बड़ी होते देखा था. बसंती इतनी संुदर तो नहीं थी लेिकन चौदह साल की दसू री लड़िकयों
के बजाय उस के ःतन काफ़ी बड़ेबड़ेलुभावनेथे. पतलेकपड़ेकी चोली के आर पार उस की छोटी
छोटी िनपपलेस साफ़ िदखाई देती थी. में अपनेआप को रोक नहींसका. एक िदन मौक़ा देख मेने
उस के ःतन थाम िलया. उस नेग़ुःसेसेमेरा हाथ झटक डाला और बोली, 'आइंदा ऐसी हरकत
करोगे तो बड़े सेठ को बता दँगू ी' भैया के डर से मेने िफर कभी बसंती का नाम ना िलया.
एक साल प��ेसऽह साल की बसंती को ब्याह िदया गया था. एक साल ससुराल में रह कर अब वो
दो महीनो केिलयेयहाँआई थी. शादी के बाद उस का बदन भर गया था और मुझेउस को चोदने
का िदल हो गया था लेिकन कुच्छ कर नहींपाता था. वो मुझ सेक़तराती रहती थी और में डर का
मारा उसेदरू सेही देख लार तपका रहा था.
अचानक क्या हुआक्या मालूम, लेिकन एक िदन माहोल बदल गया. दो चार बार बसंती मेरे
सामनेदेख मुःकराई. काम करतेकरतेमुझेगौर सेदेखनेलगी मुझेअचछा लगता था और िदल
भी हो जाता था उस के बड़ेबड़ेःतनों को मसल डालनेको. लेिकन डर भी लगता था. इसी िलए मेने
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कोई ूतीभाव नहींिदया. वो नखारें िदखती रही.
एक िदन दोपहर को में अपनेःटडी रूम में पढ़ रहा था. मेरा ःटडी रूम अलग मकान में था, में वहीं
सोया करता था. उस वईत बसंती चली आई और रोती सूरत बना कर कहनेलगी 'इतनेनाराज़
क्यूंहो मुझ से, मंगल ?'
मेने कहा 'नाराज़ ? में कहाँ नाराज़ हूँ ? में क्यंू होऊं नाराज़?'
उस की आँखों में आँसूआ गायेवो बोली, 'मुझेमालूम हैउस िदन मेनेतुमरा हाथ जो झटक िदया
था ना ? लेिकन में क्या करती ? एकओर डर लगता थाऔर दसू रे दबाने से ददर् होता था. माफ़ कर
दो मंगल मुज़े.'
इतनेमें उस की ओढनी का पल्लूिखसक गया, पता नहींकी अपनेआप िखसका या उस नेजान
बूझ के िखसकाया. नतीजा एक ही हुआ, लोव कू ट वाली चोली में से उस के गोरे गोरे ःतनों का
उपरी िहःसा िदखाई िदया. मेरेलोडेनेबग़ावत की नौबत लगाई.
में, उस में माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है म..मेने नाराज़ नहीं हूँ तो मुझे मागनी चािहए.'
मेरी िहच िकचाहत देख वो मुःकरा गयी और हँस के मुझ सेिलपट गयी और बोली, 'सच्ची ? ओह,
मंगल, में इतनी ख़ुश हूँ अब. मुज़े डर था की तुम मुज़ से रूठ गये हो. लेिकन में तुम्है माफ़ नहीं
करूं गी जब तक तुम मेरी चुिचयों को िफर नहीं छ्छु ओगे.' शमर् से वो नीचा देखने लगी मेने उसे
अलग िकया तो उस नेमेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ अपनेःतन पर रख िदया और दबाए
रक्खा.
'छ्छोड़, छ्छोड़ पगली, कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.'
'तो होनेदो. मंगल, पसंद आई मेरी चूची ? उस िदन तो येकच्ची थी, छू नेपर भी ददर् होता था.
आज मसल भी डालो, मज़ा आता है
मेने हाथ छु डा िलयाऔर कहा, 'चली जा, कोईआजाएगा.'
वो बोली, 'जाती हूँ लेिकन रात कोआऊं गी. आऊं ना ?'
उस का रात को आनेका ख़याल माऽ सेमेरा लोडा तन गया. मेनेपूच्छा, 'ज़रूर आओगी?' और
िहम्मत जुटा कर ःतन को छुआ. िवरोध िकए िबना वो बोली,
'ज़रूर आऊंगी. तुम उपर वालेकमरेमें सोना. और एक बात बताओ, तुमनेकीस लड़की को चोदा है
?' उस नेमेरा हाथ पकड़ िलया मगर हटाया नहीं.
'नहींतो.' कह के मेनेःतन दबाया. ओह, क्या चीज़ था वो ःतन. उस नेपूच्छा, 'मुज़ेचोदना है ?'
सुन तेही में चहोंक पड़ा.
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पूजा ने अपनी मम्मी की तरह चुदवाया

पूजा ने अपनी मम्मी की तरह चुदवाया

दोःतों मेरा नाम राहुल है।मेरी उॆ २३ वषर् कद ५'८" है। मैं आपको ूीित
के साथ अपने सेक्स अनुभव को अपनी िपछली कहानी में बता चुका हूं।
अब मैं अपनेिजन्दगी के एक और सेक्स अनुभव को आपको बतानेजा
रहा हूँ।
तब मेरी उॆ १९ वषर् थी मेरेअन्दर सेक्स का कीड़ा भड़क रहा था। मेरी
छु ि��टयाँ चल रही थी। हमारे घर के सामने वाले घर में एक लड़की रहती
है। उसका नाम पूजा है। हम दोनों बचपन से ही बहुत अच्छे दोःत हैं। इस
बार मैं घर दो सालों के बाद आया था। मतलब की हम दोनों पूरेदो सालों
के बाद िमलेथे। और अब वह पहलेवाली पूजा नहींथी अब वह बला की
खूबसूरत हो गई थी।
उसके अट्ठारह वषर् के भरपूर िजःम नेमेरेअन्दर की आग को और
भड़का िदया था। उसके ःतन काफी बड़ेथे। वो उसकी टाईट टी-शटर् में
िबल्कुल गोल िदखतेथेिजन्हें देखकर उन्हें हाथ में पकड़नेको जी चाहता
था। वह अकसर शाटर्-सेस पहना करती थी। बचपन में मैंने बहुत बार
खेलते हुए पूजा के ःतनों को देखा था जो िक शुरू से ही आम लड़िकयों के
ःतनों सेबड़ेथेऔर कभी कभी छू भी लेता था लेिकन मेरा मन हमेशा
उनको अच्छी तरह दबानेको करता रहता था। लेिकन मुझेडर लगता था
िक कहींवो अपनेघर वालों न बता देक्योंिक मेरी उसके बड़ेभाई के साथ
िबल्कुल भी नहींबनती थी। वो पूजा को भी मेरेसाथ न बोलनेके िलये
कहता रहता था लेिकन पूजा हमेशा मेरी तरफ ही होती थी।
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लेिकन अब पूजा बड़ी हो चुकी थी और जवानी उसके शरीर सेभरपूर
िदखनेलगी थी। मैं उसको चोदनेके िलयेऔर भी बेकरार हो रहा था।
लेिकन अब वह पहलेकी तरह मेरेसाथ पेश नहींआती थी। ऐसा मुझे
इस िलयेलगा क्योंिक वो मेरेज्यादा पास नहींआती थी। दरू सेही
मुःकरा देती थी।
लेिकन एक िदन मेरी िकःमत का िसतारा चमका और मैंनेपहली बार
ऐसा दृँय देखा था।
उस िदन मैं तकरीबन ११ बजेसुबह अपनी छत पर धूप में बैठनेके िलये
गया क्योंिक उन िदनों सिदर्यांथी। मैं अपनी सबसेऊपर वाली छत पर
जा कर कुरसी पर बैठ गया। वहाँसेसामनेपूजा के घर की छत िबलकुल
साफ िदख रही थी। मैं सोच रहा था िक पूजा तो ःकूल गई होगी। लेिकन
तभी मैंनेनीचेपूजा की आवाज सुनी। मैंनेनीचेदेखा- पूजा के मम्मी
पापा कहींबाहर जा रहेथे। थोड़ देर बाद पूजा अन्दर चली गई।
मैं सोच रहा था िक आज अच्छा मौका हैऔर मैं नीचेजाकर पूजा को
फोन करनेके बारेमें सोच ही रहा था िक मैंनेदेखा पूजा अपनी छत पर
आ गई थी। मैं उसको छु प कर देखने लगा क्योंिक मैं पूजा को नहीं िदख
रहा था।
उस िदन पूजा नेशटर् और पज़ामा पहन रखेथेऔर ऊपर सेजैिकट पहन
रखी थी। वह अभी नहाई नहींथी। तभी उसनेधूप तेज होनेके वजह से
जैिकट उतार दी और कुरसी पर बैठ गई। उसनेअपनी टांगें सामनेपड़े
बैड पर रख ली और पीछे को हो कर आराम सेबैठ गई िजसकी वजह से
उस के बड़ेबड़ेवक्ष बाहर को आ गयेथे।
मेरा िदल उनको चूसनेको कर रहा था और मैं बड़ेगौर सेउसके शरीर को
देख रहा था। तभी अचानक पूजा अपनेःतनों की तरफ देखनेलगी और
उन्हें अपनेहाथ सेठीक करनेलगी। उसके चारों तरफ ऊंची दीवार थी
इसिलयेउसनेसोचा भी नहींहोगा िक उसको कोई देख रहा है। उसी व��
उसनेअपनी शटर् के ऊपर वालेदो बटन खोल िदये। मेरेको अपनी आंखों
पर िव��ास नहीं हो रहा था िक मैं यह सब देख रहा हूं। मैंने अपने आप को
थोड़ा संभाला। लेिकन तब मैं अपनेलण्ड को खड़ा होनेसेनहींरोक पाया
जब मैंने देखा िक उसने नीचे ॄा नहीं डाला हुआ था और आधे से ज्यादा
बूब्स शटर् के बाहर थे। मैंनेअपनेलण्ड को बाहर िनकाला और मुठ मारने
लगा।
जब मैंनेिफर देखा तो पूजा का एक हाथ शटर् के अन्दर था और अपने
एक मुम्मेको दबा रही थी और आंखेबन्द कर के मज़ेलेरही थी। तभी
उस नेएक मुम्मेको िबल्कुल शटर् के बाहर िनकाल िलया जो िक
िबलकु ल गोल और बहुत ही गोरे रंग का था। उसका चूचुक बहुत ही बड़ा
था जो िक उस समय तना हुआ था और हलके भूरे रंग का था। मैं यह सब
देख कर बहुत ही उतेिजत हो रहा था और अपनी मुठ मार रहा था। तभी
उसनेअपनी शटर् का एक बटन और खोल िदया और अपनेदोनों ःतन
बाहर िनकाल िलए। िफर वो अपनेदोनों हाथों की उंगिलयों सेचूचुकों को
पकड़ कर अच्छी तरह मसलनेलगी। काफी देर तक वो अपनेवक्ष को
अच्छी तरह दबाती रही। थोड़ी देर बाद वह कुस�� सेउठी और बैड पर लेट
गई। एक हाथ से उसने अपने ःतन दबाने शुरू कर िदए और दसू रा हाथ
उसनेअपनेपजामेमें डाल िलया और अपनी चूत को रगड़नेलगी।
अब उसको और भी मःती चढ़नेलगी थी और वह अपनी गांड को भी
ऊपर नीचेकरनेलगी थी। मैं अभी सोच ही रहा था िक खड़ा हो कर
उसको िदखा दंू िक मैं उसको देख रहा हूं तभी मेरा हाथ में ही छु ट गया
और मैं अपनेलण्ड को कपड़ेसेसाफ करनेलगा। जब मैंनेिफर देखा तब
तक पूजा खड़ी हो गई थी लेिकन उसके ःतन अभी भी बाहर ही थेऔर वो
वैसे ही नीचे चली गई। लेिकन िफर भी मैं बहुत खुश था लेिकन िफर मेरे
को लगा िक मैंनेपूजा को चोदनेका मौका गंवा िदया। मुझेखड़ा हो जाना
चािहए था, ऐसा करना था वैसा करना था।
तभी मेरेिदमाग में एक िवचार आया और मैं जल्दी सेनीचेगया और
पूजा के घर फोन िकया। पहलेतो वह मेरी आवाज सुन कर थोड़ी हैरान
हुई क्योंिक फोन पर हमारी ऐसे कभी बात नहीं हुई थी लेिकन वह बहुत
खुश थी। मैं उससेसेक्स के बारेमें कोई भी बात नहींकर सका, इधर
उधर की बातें करता रहा। उस िदन हमने२ घण्टेबातें की और िफर
उसका भाई िवशाल आ गया था। शाम को उसनेमुझेिफर फोन िकया
और हमने१ घण्टा बातें की और िफर रोजाना हमारी फोन पर बातें होने
लगी। घर पर भी अकसर आमनेसामनेहमारी बातें हो जाती थी। छत
पर भी हम एक दसू रे को काफी काफी देर देखते रहते थे। लेिकन मुझे
उसके भाई से बहुत डर लगता था, इसिलए जब वह घर पर होता था मैं
पूजा सेदरू ही रहता था।
एक बार िवशाल की वजह से हमारी पूरे दो िदन बात नहीं हुई और हम
दोनों बहुत परेशान थे। हम छत पर भी नहीं िमल पाए। िवशाल ने उसको
हमारे घर भी नहीं आने िदया। मैं पूरा िदन बहुत परेशान रहा क्योंिक पूजा
मुझे िसफर् एक बार िदखी थी और हमारी बात भी नहीं हुई थी। रात के ९
बज चुके थे। मैं बैठा पूजा के बारेमें सोच रहा था। तभी बाहर की घण्टी
बजी। जब मैंनेगेट खोला तो देखा बाहर पूजा खड़ी थी।
उसने मुझसे िसफर् यह कहा,"आज रात साढ़े बारह मैं फोन करूं गी ! राहुल,
मेरा मन नहींलग रहा है !" और वापस चली गई।
मैं एक दम सेहैरान रह गया। मुझेिव��ास नहींहो रहा था। लेिकन मैं
बहुत खुश था। पहली बार िकसी से रात को बात करनी थी। गेट बन्द
करके अन्दर गया और मम्मा सेकहा पता नहींकौन था? घण्टी बजा कर
भाग गया।
११ बजे सभी सो गए, लेिकन मुझे नींद कै से आ सकती थी। मैंने दसू रे
फोन की तार िनकाल दी थी और अपनेकमरेवालेफोन की िरंग िबल्कुल
धीमी कर दी थी, कमरेका दरवाजा भी बन्द कर िलया था। तकरीबन
१२:३५ पर फोन आया। पूजा बहुत ही धीमे ःवर में बोल रही थी। उसने
बताया,"िवशाल ने हम दोनों को बात करते हुए देख िलया था। इसिलए
उसनेमुझेतुमसेिमलनेऔर फोन पर बात करनेसेमना िकया है, वह
कहता है िक तुम अच्छे लड़के नहीं हो ! लेिकन मुझे तुम बहुत अच्छे
लगते हो। तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगता है। मैं तुम से बात िकए
बगैर नहीं रह सकती। इसिलए राहुल हम रात को बात िकया करेंगे और
इस समय हमें कोई िडसटबर् भी नहींकरेगा ! खास कर िवशाल !"
ऐसे ही हमारी बहुत देर बातें होती रहीं और अब पूजा पूरी तरह मेरे जाल
में फँस चुकी थी।
मैंनेपूछा- तुम कमरेमें अकेली ही हो न ? इतनी धीमेक्यों बोल रही हो?
उसनेकहा- मेरेकमरेका दरवाजा खुला हैऔर मम्मी पापा साथ वाले
कमरेमें हैं।
तो मैंनेउसको दरवाजा बन्द करनेको कहा।
उसनेपूछा- क्यों ?
मैंनेकहा- उसके बाद मैं तुम्हारेपास आ जाऊंगा, बैड के ऊपर िबलकुल
तुम्हारेसाथ।
तो वह कहनेलगी- नहीं ! मुझेतुमसेडर लगता है। तुम मेरेसाथ कुछ
कर दोगे।
तब मैंनेउससेकहा- मैं कभी तुम्हारेसाथ जबरदःती नहींकरूंगा। जो
तुम्हें अच्छा लगेगा हम वही करेंगे।
मैंनेकहा- लेिकन पूजा मैं तुम सेलड़िकयों के बारेमें एक बात पूछना
चाहता हूं। बताओगी?
उसनेकहा "पूछो क्या पूछना चाहतेहो।"
मैंने िहचकचाते हुए कहा मैं मािसक धमर् के बारे में सब कु छ जानना
चाहता हूं।
पहलेपूजा चुप कर गई लेिकन थोड़ी देर बाद उसनेमुझेसब कुछ बताया
और उसके बाद हमारी सेक्स के बारेमें बातें शुरू हो गई।
मैंनेउसको कहा िक मैंनेउसके बूब्स देखेहैं। तो उसनेकहा आप झूठ
बोल रहेहो।
तब मैंनेछत वाली बात बता दी िक मैं सब कुछ देख रहा था। वह थोड़ा
शरमा गई और कहने लगी िक आप बहुत खराब हो। उसने कहा िक ऐसा
करनेसेउसको मजा आता है।
मैंनेपूजा को अपना हाथ पकड़ानेके िलए कहा।
उसनेकहा- फ़ोन पर कैसे ?
मैंनेकहा- बस समझ लो िक हम जैसेबोल रहेहैं, वैसेही कर भी रहेहैं।
उसनेकहा,"ठीक है ! पकड़ लो लेिकन आराम सेपकड़ना !"
थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा "तुम्हारे हाथ पकड़ने से राहुल मेरे
को कुछ हो रहा है, प्लीज अभी मेरा हाथ छोड़ दो !"
थोड़ी देर बाद उसनेकहा िक जब मैंनेपहलेउसका हाथ पकड़ा था तब
उसकी टांगो के बीच में कु छ हो रहा था उसको बहुत मजा आ रहा था और
उसकी चूत में से बहुत पानी िनकल रहा था िजस की बजह से वह घबरा
गई थी और इसीिलए उसनेमुझेहाथ छोड़नेको कहा था।
तब उसनेिफर सेहाथ पकड़नेको कहा।
मैंनेकहा- ठीक हैपकड़ा दो।
थोड़ी देर बाद उसनेकहा िक उसकी पैंटी चूत के पानी सेिबलकुल गीली
हो गई हैऔर उसके चूचुक भी िबलकुल तन गए हैं। तब मैंनेउसको
अपनेकपड़ेउतारनेको कहा। उसनेउठ कर दरवाजा बन्द कर िलया और
सारेकपड़ेउतार िदए। िफर उसनेबूब्स दबानेशुरू कर िदए और सेक्सी
सेक्सी आवाजें िनकालनेलगी। मेरा लण्ड भी िबल्कुल खड़ा हो चुका था।
पूजा अपनी उंगली सेचूत के ऊपर अपनी िशि��का को दबानेलगी और
िफर उसनेउंगली चूत के अन्दर डाल ली।
उसके मुंह सेआवाजें आ रही थी- आहहहहहहहहहहहहहहह आह
आहहहह वह कह रही थी " राहुल प्लीज चोदो मेरे को। अपना लण्ड मेरी
चूत में डालो। मेरेमुम्मों को चूसो। जोर जोर सेचोदो मेरेको।"
उस रात हमनेसुबह ५ बजेतक बात की। उसको बाद हम अकसर रात
को बातें करतेथे। लेिकन मैं उस िदन के इंतजार में था िजस िदन मैं
उसको असली में चोदं।ू
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आिखर वह िदन आ ही गया जब मेरा सपना सच
हो गया।
पूजा के एक िरँतेदार अचानक बीमार हो गयेउसके मम्मी और पापा को
उन्हें देखनेके िलयेजाना पड़ा। िकसी भी हालत में उनके तीन िदन तक
लौटने की कोई उम्मीद नहीं थी। िवशाल िदन भर दकु ान पर था। पूजा
घर में अकेली थी। लेिकन मम्मा की वजह सेमैं उससेबात नहींकर पा
रहा था। मैं अपनेकमरेमें चला गया।
मैंनेएक सेक्स मैगजीन िनकाला और देखनेलगा। उसमें कुछ नग्न
तःवीरें थी। मैं उन्हें देख रहा था तभी अचानक पीछे सेपूजा आ गई।
उसनेपूछा- क्या देख रहेहो? और वह मेरेबेड पर बैठ गई।
मैंनेपूछा- मम्मा सेक्या कहा है?
उसने कहा- आन्टी ने मुझे यहां आते हुए नहीं देखा।
तभी मैं उठा और मम्मा से कहा- मैं सोने लगा हूं !
और मैंनेदरवाजा अन्दर सेबन्द कर िलया। िफर मैंनेउसके सामनेवह
िकताब रख दी वह उसेदेखनेलगी। िफर हम दोनों सेक्स के बारेमें बातें
करनेलगे। मैं उठकर उसके पीछे खड़ा हो गया। मैंनेउसके कन्धेपर
अपना हाथ रखा और झुककर उसके कन्धों को चूम िलया। उसनेकुछ भी
ूितरोध नहीं िकया यह मेरे िलये बहुत था।
मैं उसके सामनेबैठ गया और उसके होठों को चूम िलया। मेरा हाथ तेजी
से उसकी कमर में पहुँच गया और कसकर पकड़ कर उसे अपनी ओर
खींच िलया। मेरे हाथ उसके वक्ष पर पहुँच गए और ऊपर से ही दबाने
लगा।
उसके मुँह सेूितरोध के शब्द िनकले- ओहहहहहहहहहहह नहीं ! बस
करो राहुल।
लेिकन उसके हाथो नेउतना एतराज नहींजताया। उसनेएक ढीली ढाली
टी-शटर् और साइकिलंग-शॉटर् पहन रखा था। मेरा हाथ उसकी टी-शटर् के
अन्दर उसकी ॄा के ऊपर सेही उसके उभारों को दबानेलगा। मेरी जीभ
उसके मुँह में घूम रही थी। अब उसकी तरफ सेभी सहयोग िमलनेलगा
था। मैंनेउसकी टी-शटर् िनकाल दी। उसनेपहलेना नुकुर की लेिकन मेरे
हाथ का जादूउसके िदलो िदमाग पर छा रहा था। उसका ूितरोध
नाममाऽ का था। मैं उसके ःतनों को उसकी ॄा के ऊपर सेही मुँह में लेने
लगा।
मेरा दसू रा हाथ उसकी जांघों के बीच के भाग को उसके कपडों के ऊपर से
ही सहलाने लगा। मैंने उसकी ॄा का हुक खोल िदया। उसका भरपूर
यौवन मेरेसामनेथा, िजनको मैंनेिबना एक पल की देरी िकयेअपनेमुँह
में लेिलया। वह अपनेवश में नहींथी उसनेमुझेकसकर पकड़ िलया।
मैंनेउसके बाकी बचेकपड़ों को उतार फें का और उसेबेड पर िलटाया।
मैंनेअभी तक अपनेकपड़ेनहींउतारेथे, मैंनेअपनेकपड़ेउतार िदये। मैं
अब िसफर् अन्डरिवयर में था और उसके ऊपर वापस झुक गया, उसके
िनप्पल को मुँह में लेकर चूसनेलगा। मेरेहाथ उसकी जांघों के बीच की
गहराइयों तक पहुँच गये और उसके जननांग को सहलाने लगे। उसने
अपना हाथ मेरी अन्डरिवयर में डालकर मेरेहिथयार को बाहर िनकाल
िलया।
मैं नीचेगया और अपनेहोंठ उसके जननांगों पर रख िदये। उसके मुँह से
एक सी��कार िनकल पड़ी। उसनेमुझेअपनेपैरो में फँसा िलया। मेरी
जीभ उसकी चूत के अन्दर बाहर हो रही थी। उसनेपानी छोड़ िदया, मेरी
जीभ को नमकीन ःवाद आनेलगा। उसनेमेरेलण्ड को अपनी चूत में
डालनेके िलयेमुझेऊपर की ओर खींच िलया और बोलनेलगी- प्लीज
इसेअन्दर डालो अब बरदाँत नहींहोता।
मैंनेएक पल की भी देरी नहींकी। उसकी टांगों को फैलाया और अपने
लण्ड को उसके चूत के ऊपर रखा, एक धीमा सा धक्का िदया, वह पहले
झटके को आसानी सेसहन नहींकर पाई और ददर् सेकराह उठी और
िचल्लानेलगी- ◌़◌़◌़◌़ज़ल्दी िनकालो मैं मर जाऊँगी।
मैंनेउसको कस कर पकड़ा और उसके िनप्पल को मुँह में लेकर अपनी
जीभ सेचाटनेऔर दांतों सेकाटनेलगा। थोड़ी देर में ही वह अपनी कमर
को आगेपीछे िहलानेलगी। मेरा लण्ड जो िक अभी तक चूत के अन्दर ही
था और बड़ा होनेलगा था। मेरेिलयेअब यह पल बरदाँत के बाहर था।
मैंनेभी आगेपीछे जोरों सेधक्के लगानेलगा। मेरी ःपीड लगातार बढ़ती
रही, उधर उसके मुँह सेउ��ेिजत ःवर और तेज होतेरहेऔर थोड़ी देर में
हम दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये। िफर वासना का एक
जबरदःत ज्वार आया और हम दोनों एक साथ बह गये।
मैं उसके ऊपर ही लेटा रह गया। उसनेमुझेकसकर पकड़ रखा था। थोड़ी
देर में मैं मु�� था। पूजा छु प कर अपने घर चली गई। बाद दोपहर जब
िवशाल खाना खा कर वापस दकु ान पर चला गया तो मैं मम्मा से यह
कह कर िक मैं अपने दोःत के घर जा रहा हूं, पूजा के घर चला गया। िफर
हमने शाम तक एक दसू रे के साथ सेक्स िकया, इक्कठे नहाए और पूजा
नेमेरेलण्ड को अपनेमुंह में डाल कर खूब चूसा, उसको लण्ड को चूसने
में बहुत ही मजा आ रहा था।
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उसको लण्ड को चूसने
में बहुत ही मजा आ रहा था। शाम को जब मैं जाने लगा तो उसने कहा
िक आज रात को वह मेरेसाथ सोना चाहती है।
मैंनेकहा- यह कैसेहो सकता है।
उसनेकहा िक आज रात को वह नीचेअकेली होगी और उसनेकहा िक ११
बजेबाहर आ जाना वह गेट खोल देगी।
रात को मैं ११ बजेमैं छोटेगेट सेउसको बाहर सेताला लगाकर पूजा के
घर के बाहर गया तब उसनेगेट खोल िदया और मैं अन्दर चला गया।
पूजा गेट बन्द करके अन्दर आ गई।
मैंनेपूछा- िवशाल सो गया क्या ?
उसने कहा िक िवशाल तो एक घंटे से सोया हुआ है।
तब मैंनेपूछा िक वह क्या कर रही थी। उसनेकहा," आपसेअच्छी तरह
चुदनेकी तैयारी कर रही थी।"
वह मेरेको अपनेमम्मी पापा के बैडरूम में लेगई और आप बाथरूम में
चली गई। थोड़ी देर बाद जब वह बाहर आई उसनेछोटी सी नाईटी जो िक
िबलकु ल पारदरशी थी पहनी हुई थी। उसने नीचे कु छ भी नहीं पहना हुआ
था। उसके मुम्मेऔर चूत िदख रहेथे। उसनेकहा- यह नाईटी मम्मा की
हैऔर आज वह मम्मा की तरह ही चुदना चाहती है।
मैंनेपूछा- मम्मी की तरह का क्या मतलब है?
उसनेकहा िक एक रात वह बाथरूम जानेके िलए उठी तो उसनेदेखा िक
मम्मी पापा के कमरेकी लाईट जल रही थी। उसनेिखड़की में सेदेखा तो
मम्मी ने यह ही पहनी हुई थी। उसके बाद उसने २ घण्टे मम्मी को पापा
सेचुदतेदेखा।
थोड़ी देर बाद मैंने देखा िक पूजा ने चूत के सारे बाल साफ िकये हुए थे।
उसके बाद हम िफर से एक दसू रे के िलए िबल्कु ल तैयार थे। उस रात
सुबह ५ बजे तक िबल्कु ल नंगे एक दसू रे की बाहों में रहे और इस बीच
मैंने उसको तीन बार चोदा। उसने मेरे लण्ड को बहुत चूसा।
अगले दो िदन भी हम ऐसे ही एक दसू रे की बाहों में मजे करते रहे। अब
हमें जब भी मौका िमलता हैहम इसका आनन्द उठातेहैं।
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